शुक्रवार, 13 अगस्त 2021

देश और नागरिक

                     हम और हमारा देश                                                     किसी भी देश के लिए  उसके नागरिकों का शिक्षित, जागरूक और व्यापक सोच का होना आवश्यक है ।यदि उस देश के नागरिक शिक्षित ,व्यापक सोच  और सकारात्मक मानसिकता के होंगे तो वो देश दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर सकता है। जहां तक भारत का प्रश्न है , यह देश  विभिन्न, जातियों, धर्मो, जलवायु और संस्कृतियों वाला राष्ट्र है । यहां समय-समय पर अलग-अलग तरह की शासन व्यवस्था रही है। देशवासियों ने शोषण करने वाली ब्रिटिश शासन भी देखा है और उससे पूर्व मुगलों का साम्राज्य भी। दोनों शासन व्यवस्था  विदेशी ही थी लेकिन दोनों में मूलभूत अंतर देखने को मिला ।जहां (मुग़ल) अपनी संस्कृति और सभ्यता के साथ साथ यहां शासन कर रहे थे और हमारे देश को सुरक्षा के साथ-साथ स्थापत्य कला और खानपान की एक विशाल श्रृंखला प्रदान कर रहे थे  जिसे हम आज भी बड़े गर्व से भारत की एक उपलब्धि मानते हैं।  वहीं इसके विपरीत अंग्रेजी शासन व्यवस्था ने  प्रशासनिक सुधार किए और रेलवे लाइनों का  यहाँ जाल बिछाना शुरू किया । उनकी राजनीतिक सोच भारतीयों के विपरीत थी । वो "बांटो और राज करो " की नीति पर चलते थे और देश के निम्न वर्ग को और निम्न बनाने पर बल देते थे। भारतीयों की प्रतिभाओं का इतना आदर नहीं था जितना होना चाहिए था।इसीलिए  अट्ठारह सौ सत्तावन से एक जन आंदोलन चला। जिसको हम प्रथम  स्वतंत्रता आंदोलन के नाम से जानते हैं । यह आंदोलन विभिन्न रूप बदलता हुआ और कुर्बानियां देने के बाद 15 अगस्त ,1947  की मध्य रात्रि को स्वतंत्र भारत के रूप में स्थापित हुआ ।                                            इसके पश्चात  शुरू होता है भारतीय लोकतंत्र का एक नया अध्याय । हमारी शासन व्यवस्था हमारा संविधान हमारे देशवासियों के पास आया और हमने ऐसी व्यवस्था कायम की जिसमें सभी धर्मों सभी जातियों का विशेष ध्यान रखा गया और हम मिलजुल कर एक विशाल सशक्त भारत बनाने की परिकल्पना लेकर आगे बढ़े ।यह अलग बात है  कि धीरे-धीरे हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था शिथिल होती गई लेकिन फिर भी हमने अपने मूल्यों को बनाए रखा ।जो आज भी जारी है ।हमारे देश की एक विशेषता है  संविधान के अनुसार देश को चलाना। इसके साथ ही समन्वय की भावना भी हमारे राष्ट्र की एक पहचान रही है।जिसे  हम आज भी कायम किए हुए हैं ।इसके साथ ही भारतीय लोकतंत्र विश्व में सबसे बड़ा लोकतंत्र कहने का अधिकारी है ।हमारा देश एक गणराज्य है ,विभिन्न राज्यों का एक अजायबघर है,  बोलियों,भाषाओं, जातियों और विविध संस्कृतियों को एक राष्ट्र के रूप में समाहित किए हुए और सभी को पूर्ण मान्यता देते हुए इक्कीसवीं सदी का भारत नई इबारत लिख रहा है।जिसमे सभी जातियों, समुदायों ,रीतियो और नीतियों का साथ मिला हुआ है। अलग अलग राज्यो की अलग अलग संस्कृति और रीतियों के बीच एक ही राष्ट्र तिरंगे झंडे को सलामी देते हुए हर वर्ष 26 जनवरी और 15 अगस्त को एक नए उत्साह और यौवन के साथ नज़र आता है।।     

                   लेखक                                                              डॉ ज़ुल्फ़िकार गुन्नौरी                                              शिक्षक,चिंतक एवं समाजसेवी                        

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