रविवार, 30 अक्टूबर 2022

हमसफर सोसायटी का सफर

एक छोटे से व्हाट्सएप ग्रुप में कुछ हमदर्द और शिक्षित साथियों को जोड़कर समाज की अच्छाई को उजागर किया गया और बुराई से बचने का रास्ता दिखाया गया। सभी साथी रोज कोई न कोई खूबसूरत मेसेज या वीडियो पोस्ट करता बाकी उसको सराहते और आगे बढ़ाते । यह सिलसिला कई महीनों चलता रहा। एक दिन हमारे एक सीनियर साथी मो. निजाम साहब मरहूम ने मुझसे कहा कि इतने अच्छे अच्छे मेसेज हमसफर में पोस्ट होते हैं तो भेजने वाले भी यकीनन अच्छे ही होंगे।हम लोग महीने में एक दिन मुकर्रित कर लेते हैं और बैठा करेंगे। मैंने उनकी इस बात को अमली जामा पहनाने के लिए सभी साथियों से बात की और एक मेसेज हमसफर ग्रुप में भी पोस्ट कर दिया। ज्यादातर साथियों ने इस पर अलबबैक कहा और एक दिन ( ) हम चंद लोग जमा हुए। मीटिंग कामयाब रही,इस मीटिंग में ही यह तय किया गया कि 100 ₹ महीने हम सभी जमा किया करेंगे और मीटिंग में जो खाना पीना हुआ करेगा इसी कलेक्शन से हुआ करेगा। कुछ दिनों के बाद हमने यह महसूस किया कि हम सभी अच्छी सोच के लोग हैं तो क्यों न कुछ अच्छे नेक काम किए जाएं। यहीं से हमसफर के सामाजिक सरोकारों के काम की शुरुआत हुई।

बुधवार, 18 अगस्त 2021

पेट्रोल के बढ़ते दाम ज़िम्मेदार कौन?

*लगातार बढ़ते पेट्रोलियम पदार्थों के दाम, ज़िम्मेदार कौन!* 
यूं तो पेट्रोलियम पदार्थों के रेट थोड़े बहुत आमतौर पर घटते/ बढ़ते  रहते  हैं , लेकिन पिछले कुछ सालों से इन पदार्थों के दामों में हो रही बेकाबू तेजी यह दर्शाती है कि कहीं न कहीं कुछ ठीक नहीं चल रहा । यह चाहे पेट्रोलियम पदार्थों की कंपनियों के द्वारा हो या सरकार द्वारा,  कहीं तो जनता की अनदेखी की जा रही है। एक तो भारतीय जनता की कोरोना महामारी  आर्थिक स्थिति वैसे ही दयनीय चल रही  है । उसके साथ ही कुछ सरकारी नीतियों से भी जनता पर अनावश्यक बोझ पड़ा है  उसके बाद पेट्रोलियम पदार्थों का बढ़ना किसी भी स्थिति में सही नहीं है। सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि इस विषय पर गंभीरता दिखाते हुए बढ़ती हुई महंगाई पर रोक लगाए विशेष कर डीज़ल पेट्रोल और रसोई गैस पर। हम भी उसी  विश्व का हिस्सा हैं जहां अन्य देश अपनी अर्थव्यवस्था को संभाले हुए हैं, पूरे विश्व मे भारत ही अकेला ऐसा देश है जहाँ पेट्रोलियम पदार्थों पर इतना भारी भरकम टेक्स लगाया जा रहा है ,जो लगभग 150 प्रतिशत से भी अधिक हो चुका है। जबकि हमारे देश में खनिज पदार्थ और कृषि उत्पादन अन्य  देशों से  बेहतर है। इसके अलावा हमारे उद्योग धंधे भी कम विकसित नहीं है। इतने होने पर भी बड़े-बड़े टैक्स लगाना और पेट्रोलियम पदार्थों के दामों को काबू में  ना करना यह सरकार की एक बड़ी नाकामी कहा जा सकता है। जिसको गंभीरता से लेने की आवश्यकता है । जनता लगातार सरकार को समर्थन करती आ रही थी।  आंदोलन और आलोचना से भी बच रही थी  लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जनता की आर्थिक स्थिति और उसके भावनाओं की अनदेखी की जाए। सरकार की पहली प्राथमिकता जनता की सुख सुविधाओं और सुरक्षा की गारंटी होनी चाहिए न कि बयानबाज़ी और तर्कों से अपना बचाव करना।                                                              *डॉ ज़ुल्फ़िकार*                                                           ( शिक्षक)  ,                      ए एम यू,अलीगढ़।

शुक्रवार, 13 अगस्त 2021

देश और नागरिक

                     हम और हमारा देश                                                     किसी भी देश के लिए  उसके नागरिकों का शिक्षित, जागरूक और व्यापक सोच का होना आवश्यक है ।यदि उस देश के नागरिक शिक्षित ,व्यापक सोच  और सकारात्मक मानसिकता के होंगे तो वो देश दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर सकता है। जहां तक भारत का प्रश्न है , यह देश  विभिन्न, जातियों, धर्मो, जलवायु और संस्कृतियों वाला राष्ट्र है । यहां समय-समय पर अलग-अलग तरह की शासन व्यवस्था रही है। देशवासियों ने शोषण करने वाली ब्रिटिश शासन भी देखा है और उससे पूर्व मुगलों का साम्राज्य भी। दोनों शासन व्यवस्था  विदेशी ही थी लेकिन दोनों में मूलभूत अंतर देखने को मिला ।जहां (मुग़ल) अपनी संस्कृति और सभ्यता के साथ साथ यहां शासन कर रहे थे और हमारे देश को सुरक्षा के साथ-साथ स्थापत्य कला और खानपान की एक विशाल श्रृंखला प्रदान कर रहे थे  जिसे हम आज भी बड़े गर्व से भारत की एक उपलब्धि मानते हैं।  वहीं इसके विपरीत अंग्रेजी शासन व्यवस्था ने  प्रशासनिक सुधार किए और रेलवे लाइनों का  यहाँ जाल बिछाना शुरू किया । उनकी राजनीतिक सोच भारतीयों के विपरीत थी । वो "बांटो और राज करो " की नीति पर चलते थे और देश के निम्न वर्ग को और निम्न बनाने पर बल देते थे। भारतीयों की प्रतिभाओं का इतना आदर नहीं था जितना होना चाहिए था।इसीलिए  अट्ठारह सौ सत्तावन से एक जन आंदोलन चला। जिसको हम प्रथम  स्वतंत्रता आंदोलन के नाम से जानते हैं । यह आंदोलन विभिन्न रूप बदलता हुआ और कुर्बानियां देने के बाद 15 अगस्त ,1947  की मध्य रात्रि को स्वतंत्र भारत के रूप में स्थापित हुआ ।                                            इसके पश्चात  शुरू होता है भारतीय लोकतंत्र का एक नया अध्याय । हमारी शासन व्यवस्था हमारा संविधान हमारे देशवासियों के पास आया और हमने ऐसी व्यवस्था कायम की जिसमें सभी धर्मों सभी जातियों का विशेष ध्यान रखा गया और हम मिलजुल कर एक विशाल सशक्त भारत बनाने की परिकल्पना लेकर आगे बढ़े ।यह अलग बात है  कि धीरे-धीरे हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था शिथिल होती गई लेकिन फिर भी हमने अपने मूल्यों को बनाए रखा ।जो आज भी जारी है ।हमारे देश की एक विशेषता है  संविधान के अनुसार देश को चलाना। इसके साथ ही समन्वय की भावना भी हमारे राष्ट्र की एक पहचान रही है।जिसे  हम आज भी कायम किए हुए हैं ।इसके साथ ही भारतीय लोकतंत्र विश्व में सबसे बड़ा लोकतंत्र कहने का अधिकारी है ।हमारा देश एक गणराज्य है ,विभिन्न राज्यों का एक अजायबघर है,  बोलियों,भाषाओं, जातियों और विविध संस्कृतियों को एक राष्ट्र के रूप में समाहित किए हुए और सभी को पूर्ण मान्यता देते हुए इक्कीसवीं सदी का भारत नई इबारत लिख रहा है।जिसमे सभी जातियों, समुदायों ,रीतियो और नीतियों का साथ मिला हुआ है। अलग अलग राज्यो की अलग अलग संस्कृति और रीतियों के बीच एक ही राष्ट्र तिरंगे झंडे को सलामी देते हुए हर वर्ष 26 जनवरी और 15 अगस्त को एक नए उत्साह और यौवन के साथ नज़र आता है।।     

                   लेखक                                                              डॉ ज़ुल्फ़िकार गुन्नौरी                                              शिक्षक,चिंतक एवं समाजसेवी                        

रविवार, 4 जुलाई 2021

हम और हमारा देश

भारत एक ऐसा देश है जो विभिन्न धर्मो, जातियों, जलवायु और भाषाओं का अजायबघर कहा जा सकता है। यही कारण है की प्राचीन काल से ही भारत की ओर विश्व के अनेक योद्धाओं और देशों ने ललचाई दृष्टि से देखा।भारत देश का यह आकर्षण ही कहा जायेगा कि मुगल साम्राज्य के शासकों ने तो भारत को अपना ही देश मान लिया और यही रच बस गएऔर यहां तक के इस धरती में ही समा गए। मुग़ल बादशाह हों ने इस देश को वैभवशाली इमारतें और व्यवस्थाएं प्रदान कीं। इसके बाद ब्रिटिश व्यापारिक ईस्ट कंपनी ने भारत की ओर कूच किया । धीरे धीरे यहां अपना व्यापार बढ़ाया और उसके माध्यम से धीरे-धीरे यहां की शासन व्यवस्था भी हतिया ली किन्तु मुग़ल शासकों की भांति यहाँ रच बस न सके और न ही इस देश से भावनात्मक रूप से जुड़ सके। बल्कि यहां से बहुत कुछ ले गए ।देने को मात्र कुछ प्रशासनिक व्यवस्थाएं ,अंग्रेजी भाषा और  इसके साथ ही  हमारे एक देश के दो टुकड़े भी कर गए, जिसको आज भी हमारा देश भोग रहा है। इतना ही नहीं उन्होंने कुछ ऐसा षड्यंत्र रचा जिसके दूरगामी परिणाम आज भी  हमारे देश को भुगतने पड़ रहे हैं। हमारा एक राष्ट्र अनेक जातियों, उप जातियों, भाषाओं और धर्मों में  उलझ गया । देश मे अलगाव  और नफरत की  राजनीति को बल मिलने लगा। यह सब स्थिति उत्पन्न करने में ब्रिटिश शासकों का अहम किरदार रहा है ।  यह अलग बात है कि  इसके पीछे हमारी देशी रियासतों और  रजवाड़ों के निजी स्वार्थ  भी सिद्ध हुए। लेकिन स्वतंत्र भारत में हमारे देश के कर्णधारो  और सरकार ने  देश को एक आधुनिक ,सक्षम ,पंथनिरपेक्ष गणराज्य बनाकर विश्व में एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया ।यही कारण है कि आज भी विश्व भर में भारत को एक अलग और सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। उसके पीछे जहां यहां के संसाधन ,जनसंख्या और प्रतिभाओं का योगदान  रहा है वहीं  यहां की मिली-जुली संस्कृति और सहभागिता ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वरूप बदलता गया यहां की राजनीति भी दूषित होती गई । जहां स्वतंत्रता  पश्चात की राजनीति पूर्णता देश को समर्पित और व्यापक सोच के साथ आगे बढ़ी थी, वही धीरे-धीरे  भारतीय राजनीति में जातिवाद, क्षेत्रवाद और संप्रदायवाद  का घिनौना चेहरा उभरना शुरू हो गया जो भारत ही नहीं किसी भी विकासशील  देश के लिए एक अभिशाप से कम नहीं है। अब जब स्वतंत्रता क्रांति हो चुकी है और भारत एक नए युग में प्रवेश कर रहा है ।ऐसी  स्थिति में हमारे देश के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य बन जाता है कि हमें गंभीरता से और सहनशीलता से देश को एक सूत्र में बांधे रखना है भले ही उसके लिए हमें छोटे-मोटे त्याग क्यों ना करने पड़े क्योंकि यही त्याग और आपसी भाईचारा देश की जड़ों को मज़बूती  देगा। हमें अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था को और ईमानदारी से मजबूत करना होगा। इसके साथ ही लोकतंत्र के चौथे स्तंभ अर्थात पत्रकारिता को निष्पक्षता के साथ  मजबूत करने की आवश्यकता है।
डॉ  ज़ुल्फ़िकार गुन्नौरी

शनिवार, 27 फ़रवरी 2021

जीवन खुशहाल जीना भी एक कला है

इंसान की शक्ल में पैदा होना एक महत्वपूर्ण और सुंदर घटना है । जिसको हम सभी बहुत ही सरलता से लेते हैं ।  ज़िन्दगी विशेष रूप से हमे एकमात्र अवसर देती है।जिसने इसकी महत्ता और विशेषता को पहचान लिया समझो उसने दुनिया ही समझ ली। इसके साथ ही अनुशासन और काम करने का  ढंग भी हमें सबसे अलग और विशेष बना देता है। हमारे ज़रिए किए गए काम हमको एक पहचान देते हैं। इसलिए हमें छोटे से छोटा काम भी खूबरसूरती से करना चाहिए। तभी हमारी समाज मे एक अच्छी पहचान बन सकती है।

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021

जागना और सोना

हमें जागने और सोने का नियम बना लेना चाहिए। जल्दी उठने का नियम जल्दी सोना है। जल्दी सोने से बहुत सी बीमारियों से बचा जा सकता है। 

गुरुवार, 24 मई 2012

ye dunia bhi ajeeb manch he , kabhi insan ko ashaon ke maidan ki sair karati he.to kabhi irasha ke andhere dal-dal me le jati he... Lekinmahan log dono hi isthiti me vichlit nahi hote.. lagataar sangharsh karte rehte hain.. shayad isi jaddo jehad ka nam he zindigi..zulfi,