रविवार, 30 अक्टूबर 2022
हमसफर सोसायटी का सफर
एक छोटे से व्हाट्सएप ग्रुप में कुछ हमदर्द और शिक्षित साथियों को जोड़कर समाज की अच्छाई को उजागर किया गया और बुराई से बचने का रास्ता दिखाया गया। सभी साथी रोज कोई न कोई खूबसूरत मेसेज या वीडियो पोस्ट करता बाकी उसको सराहते और आगे बढ़ाते । यह सिलसिला कई महीनों चलता रहा। एक दिन हमारे एक सीनियर साथी मो. निजाम साहब मरहूम ने मुझसे कहा कि इतने अच्छे अच्छे मेसेज हमसफर में पोस्ट होते हैं तो भेजने वाले भी यकीनन अच्छे ही होंगे।हम लोग महीने में एक दिन मुकर्रित कर लेते हैं और बैठा करेंगे। मैंने उनकी इस बात को अमली जामा पहनाने के लिए सभी साथियों से बात की और एक मेसेज हमसफर ग्रुप में भी पोस्ट कर दिया। ज्यादातर साथियों ने इस पर अलबबैक कहा और एक दिन ( ) हम चंद लोग जमा हुए। मीटिंग कामयाब रही,इस मीटिंग में ही यह तय किया गया कि 100 ₹ महीने हम सभी जमा किया करेंगे और मीटिंग में जो खाना पीना हुआ करेगा इसी कलेक्शन से हुआ करेगा। कुछ दिनों के बाद हमने यह महसूस किया कि हम सभी अच्छी सोच के लोग हैं तो क्यों न कुछ अच्छे नेक काम किए जाएं। यहीं से हमसफर के सामाजिक सरोकारों के काम की शुरुआत हुई।
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